अपनी
मौन सांसे
तुम को देना चाहती हूँ,
कि तुम,
इन्हे शब्द देकर,
स्वर देकर,
रंग देकर
दे दो इन्हे
एक नया अर्थ,
एक नयी लय,
एक नया रूप,
और
वो भी
जो इन सब के बीच भी
अनकहा सा रह जाता है
Friday, April 23, 2010
Monday, April 5, 2010
कौन हो तुम
कौन हो तुम
मेरे
भूत, वर्तमान या भविष्य
जो था कल
उस में तो नही हो तुम,
जो चल रहा है,
वहाँ भी नही हो तुम
और
जो कल होगा
वहाँ भी नही होगे तुम
फिर
ये धड़कन
ये साँस
क्यों कहती है मुझसे
कि
तुम हो
पल-पल,हर -पल
मेरे
भूत, वर्तमान या भविष्य
जो था कल
उस में तो नही हो तुम,
जो चल रहा है,
वहाँ भी नही हो तुम
और
जो कल होगा
वहाँ भी नही होगे तुम
फिर
ये धड़कन
ये साँस
क्यों कहती है मुझसे
कि
तुम हो
पल-पल,हर -पल
Monday, March 29, 2010
नींद
कोरी- सी ये रात,
तेरी नींद के सिरहाने रख आई थी मैं,
जब जागना तो इसे भी,
थोडा-सा उनींदा सा कर देना
तेरी नींद के सिरहाने रख आई थी मैं,
जब जागना तो इसे भी,
थोडा-सा उनींदा सा कर देना
Wednesday, March 17, 2010
जस -का -तस
ढलता सूरज,
फीकी कड़क -चाय
और
सूनी सी- छत
अब भी सब कुछ वैसा ही है
पर,
ये सब बिना किसी आहट के,
बस गुजर भर जाते है दिनचर्या में
मन का शोर
इन्हे अनसुना कर
अपनी ही धुन में
धडकता है,
और
वहां
सूरज
चाय
छत
सब कुछ
जस का तस है
फीकी कड़क -चाय
और
सूनी सी- छत
अब भी सब कुछ वैसा ही है
पर,
ये सब बिना किसी आहट के,
बस गुजर भर जाते है दिनचर्या में
मन का शोर
इन्हे अनसुना कर
अपनी ही धुन में
धडकता है,
और
वहां
सूरज
चाय
छत
सब कुछ
जस का तस है
Monday, March 8, 2010
औरत :एक प्रेरणा
मैंने,
स्थगित कर रखी है,
कुछ यात्राए
और चोराहे पर खड़े हो
पढ़ रही हूँ रास्तो को
हर आने जाने वाले से
गर्म जोशी से हाथ मिलाती हूँ
अनुभव करती हूँ
उनकी थकान,
और
बस सहला देती हूँ पीठ
कि चलो,
आगे बढ़ो,
फिर किसी और
चोराहे पर मिलूंगी
तुम्हे
उम्मीदों का दामन पकडे
स्थगित कर रखी है,
कुछ यात्राए
और चोराहे पर खड़े हो
पढ़ रही हूँ रास्तो को
हर आने जाने वाले से
गर्म जोशी से हाथ मिलाती हूँ
अनुभव करती हूँ
उनकी थकान,
और
बस सहला देती हूँ पीठ
कि चलो,
आगे बढ़ो,
फिर किसी और
चोराहे पर मिलूंगी
तुम्हे
उम्मीदों का दामन पकडे
Friday, March 5, 2010
विकल्प
कल कहा था उसने
कि मेरा कोई विकल्प ढूंढ़ लो,
जीना आसान हो जायेगा
सुना और मुस्करायी थी मैं,
क्या इसे पता नही
कि औरत के जीवन के,
विकल्प ही है,
ये
चुप्पी और आंसू
कि मेरा कोई विकल्प ढूंढ़ लो,
जीना आसान हो जायेगा
सुना और मुस्करायी थी मैं,
क्या इसे पता नही
कि औरत के जीवन के,
विकल्प ही है,
ये
चुप्पी और आंसू
Thursday, March 4, 2010
आना तेरा
"वो जब -जब आया मेरे पास,
जिन्दगी ही लेकर आया
पर मैं उस से जिन्दगी के बदले,
एक मौत ही मांगती रही"
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