Sunday, June 10, 2012

mere sabd tere arth: साथ ....ना तेरी मंजिल हूँऔरना तेरा रास्ता ।...

mere sabd tere arth:

साथ ....

ना तेरी मंजिल हूँ
और
ना तेरा रास्ता ।
...
: साथ .... ना तेरी मंजिल हूँ और ना तेरा रास्ता । फिर भी तेरी दो दुनियाओ  के बीच 'मैं' हूँ । एक से चलकर दूसरी तक पहुचंने  का सफ़र ...


साथ ....

ना तेरी मंजिल हूँ
और
ना तेरा रास्ता ।
फिर भी
तेरी दो दुनियाओ  के बीच
'मैं' हूँ ।
एक से चलकर दूसरी तक
पहुचंने  का सफ़र
तू मेरे साथ ही तय करता है
और
मैं तेरे इस छोटे से 'साथ '
को भी जीती हूँ बरसों .........।

Tuesday, February 15, 2011

अमानत

तेरे लिए,
कुछ खामोश पन्ने
मैं हर रोज लिखती हूँ
कि जब तू मिलेगा,
तो
थमा दूगी तुझे
तेरी अमानत

Saturday, November 27, 2010

विराम

जीवन की इस पंक्ति पर

विराम लग गया है

इस ओर या उस ओर

कहीं तो होगा

इस जीवन का अर्थ

जो कुछ चिन्हों की सीमाओ में बंधा

सिर्फ देखता है मुझे

इस अर्थ का विस्तार चाहती हूँ

उस क्षितिज से भी दूर,

आकाश से ऊँचा,

प्रथ्वी से विस्तृत

सम्पूर्णता की कोई चाह नही ,

बस इतना भर,

अपने हिस्से का आकाश,

अपने हिस्से की जमीं,

जो सिर्फ मेरी हो

....... मेरी हो

Saturday, September 25, 2010

गुस्सा

जानते हो,
कभी-कभी
मन करता है कि
बच्चो जैसी लडाई कर लू तुम से,
कुट्टी-पुच्ची वाली
वापस कर दूँ तुम्हारी चीजे
और
मांग लूँ अपनी हर चीज
थोडा सा अपना मुहं फुलाकर
कहूँ तुम से
"नहीं बोलती तुम से
खूब ......
गुस्सा हूँ "
पर जानती हूँ
इस सब के बावजूद भी,
तुम हमेशा की तरह
गंभीर होकर,
मुस्करा कर चले जाओगे
और
छोड़ जाओगे
मुझे
ढेर सारे सवालों-जबाबों के बीच

Sunday, September 5, 2010

द्वीप

"मैं द्वीप होना चाहती हूँ ,
तेरे सागर का ,
जो तेरा होकर भी ,
तेरा नही हैं "

Thursday, August 12, 2010

रिश्ता

इतना ही तो कहा था
जाओ
मुक्त हो तुम
निरासक्त
निर्द्वन्द
निर्भय
और
तुम लौट आये
मेरे ही आँचल में,
पलकों की कोर में ,
बाहों के समुन्दर में
दरसल,
ये दूरिया और नजदिकिया थी
मेरे और तेरे वजूद की
जो कभी सीप होना चाहती थी
तो कभी बूंद