Sunday, September 5, 2010

द्वीप

"मैं द्वीप होना चाहती हूँ ,
तेरे सागर का ,
जो तेरा होकर भी ,
तेरा नही हैं "

Thursday, August 12, 2010

रिश्ता

इतना ही तो कहा था
जाओ
मुक्त हो तुम
निरासक्त
निर्द्वन्द
निर्भय
और
तुम लौट आये
मेरे ही आँचल में,
पलकों की कोर में ,
बाहों के समुन्दर में
दरसल,
ये दूरिया और नजदिकिया थी
मेरे और तेरे वजूद की
जो कभी सीप होना चाहती थी
तो कभी बूंद

Sunday, July 25, 2010

बेटी की पहली कमाई माँ के लिए

बेटी
जब तुम
कमाना
अपना पैसा
तो मुझे बस खरीद देना
दो रंग
एक हरा
एक नीला
मेरे जीवन के ये रंग सूख गये है
चूल्हे कि कालिख ने मुझ में
भर दिया है कालापन
और
तुम सब के सपनों में रंग भरते भरते
मैं अब
बे-रंग हो चली हूँ
जब तू खरीद देगी मुझे ये रंग
तो मैं भी
धरती कि हरियाली
और
आसमान के नीले विस्तार को
कुछ दिन ही सही
पर
जी तो लूगी

Thursday, July 8, 2010

खालीपन

कुछ भर जाता है वो मुझ में ,

क्या है ये,नही जानती

पर जो भी है वो बूंद -बूंद नही ,

सागर -सागर सा लगता है

Wednesday, May 26, 2010

Sunday, May 23, 2010

महक

एक बार की ही तो,
चाहत थी उस की
मेरे बालो को अंजुरी में भर
सूंघ लेने की
और
बस दो पल ही
उस की लम्बी सांसे
मेरी खुशबू को पीती रही
उस के बाद
जब-जब ये जुल्फे खुली
तो
उस की सांसो की महक से
महकाती रही मुझे

Saturday, May 15, 2010

गणित

कुछ सपने हैं
तेरे और मेरे बीच,
जो कभी हंसाते है
तो कभी रुलाते भी
पर अक्सर ये खामोश कर जाते है तुझ को
तू उलझ जाता है इन
सपनो के गणित में
और
तब दो -दो चार के योग से बाहर हो जाता है
इन सारे सपनो का भूगोल