Sunday, July 25, 2010

बेटी की पहली कमाई माँ के लिए

बेटी
जब तुम
कमाना
अपना पैसा
तो मुझे बस खरीद देना
दो रंग
एक हरा
एक नीला
मेरे जीवन के ये रंग सूख गये है
चूल्हे कि कालिख ने मुझ में
भर दिया है कालापन
और
तुम सब के सपनों में रंग भरते भरते
मैं अब
बे-रंग हो चली हूँ
जब तू खरीद देगी मुझे ये रंग
तो मैं भी
धरती कि हरियाली
और
आसमान के नीले विस्तार को
कुछ दिन ही सही
पर
जी तो लूगी

4 comments:

  1. रंग बेटी में भरा .. अब बेटी रंग भरेगी
    बहुत खूबसूरत जज़्बात हैं

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  2. चलो ! किसी माँ ने अपनी बेटी की कमाई से कुछ माँगा तो. वरना हमारे समाज में तो बेटी की कमाई छूना भी पाप समझा जाता है. ज्यादा से ज्यादा माँयें कह देती हैं कि अपने लिए गहने बनवा लो या और कोई दहेज का सामान खरीद लो.
    अच्छी रचना है.

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  3. बहुत खूबसूरत जज़्बात हैं.......

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  4. संवेदनशील!
    उम्दा!

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sabd mere hai pr un pr aap apni ray dekr unhe nya arth v de skte hai..